Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति के दिन करें ये शुभ आरती, भगवान सूर्य देव होंगे प्रसन्न

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Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति के दिन करें ये शुभ आरती, भगवान सूर्य देव होंगे प्रसन्न

Surya Dev Aarti Lyrics: हर साल लोहड़ी के अगले दिन मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति को कई नामों से जाना जाता है जैसे- उत्‍तरायण, पोंगल और खिचड़ी आदि। इस दिन स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। मान्यता के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है। कुंडली में सूर्य ग्रह के मजबूत होने से इंसान को जीवन में सफलता प्राप्त होती है। धार्मिक मत है कि मकर संक्रांति की पूजा के समय सूर्य देव की आरती करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और पूजा सफल होती है। चलिए पढ़ते हैं सूर्य देव की आरती।

Makar Sankranti 2024 मकर संक्रांति के दिन करें ये शुभ आरती
Makar Sankranti 2024 मकर संक्रांति के दिन करें ये शुभ आरती

सूर्य देव आरती लिरिक्स (Surya Dev Aarti Lyrics)

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।

अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।

फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।

गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।

स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।

प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।

वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।

ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।

।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।

जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।

धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।

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