95 वर्ष के वृद्ध संत स्वामी संत शरण जी महाराज कृपा करके दर्शन देने आये ! Bhajan Marg

Estimated read time 1 min read

Bhajan Marg:- श्री दास महाराज जी दंडवत प्रणाम राधा स्वामी जी के गूढ़ रहस्य को शगुन और जानने की इच्छा रखता है विकार भरे शरीर से जितना वजन होता है उससे मानसिक चिंतन बनता है पर वह रस देश का चिंतन करना चाहता है आचार्य के चरणारविंद में मन वचन और कर्म से समर्पण नहीं होता तब तक दे भाव का विस्मरण नहीं होता और बिना दे भाव का विस्मरण हुए शहरी बाबू का अनुभव है स्वामी जी के रस में प्रवेश नहीं बाय साधना करना अलग बात है ना पाई ना पाई है बिन स्वामी अकेली विपिन बसत बैरागी जुलाई खेल या ज्ञानवत्सल स्वामी जी के रस प्राप्त कर सकता वह तो सिर्फ स्वामी जी देते हैं इसलिए मन वचन कर्म से अपने आचार्य के पूर्ण समर्पित हो जाता है दूसरे को अन्य जाति के कीड़े को अपने घरों में मिलाकर अपने प्रभाव से बना देता है

रोजाना अपडेट के लिए व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करें

HTML tutorial

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours